भारत- अनेकता में एकता।

भारत- अनेकता में एकता।
यहां हिन्दू है, मुसलमान है, सिख है ईसाई हैं।
यहां ईद की खीर भी है, दीवाली के लडू भी है।
क्रिसमस का केक है, तो गुरुद्वारे का कड़ा प्रसाद है।
गंगा की पवित्रता है,
केदारनाथ की आस्था है,
अजमेर की चादर है,
अमृतसर की अरदास है।
बनारस के घाट में हिन्द है,
हावड़ा पुल में हिन्द है,
ये वो देश जहां अतिथि भगवान है,
ताज महल उस देश का दिल है।
विवेकानन्द के अनूठे रहस्य यहाँ,
गांधी के मूल यहाँ,
सुबाष चंद्र बोस की प्रतिभा यहाँ,
रामानुजन का शून्य यहाँ।
पंजाब के राजमा है जहाँ
राजस्थान की दाल बाटी,
महारष्ट्र के वड़ा पाव,
दिल्ली की पानी पूरी।
सब अलग है
फिर भी एक है
सब दूर है
फिर भी करीब है
अनेकता तो है हज़ार
फिर भी एक है
ये भारत है
यहाँ सब में प्रेम है।

Poem by Aarushi Sharma